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Thursday, February 2, 2023

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षटतिला एकादशी 2023: कब है षटतिला एकादशी ? पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, पारण के समय और महत्व के बारे में जानें



षटतिला एकादशी 2023 तिथि: माघ के महीने (माघ मास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पट्टिला एकादशी (षटतिला एकादशी) के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी में भगवान विष्णु की पूजा के अलावा छह तरह से तिलतिल) का प्रयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को धारण से किसी व्यक्ति को कन्यादान, हजारों वर्षों के तपस्या और स्वर्ण दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। जानें षटतिला एकादशी 2023 कब है और शुभ मुहूर्त, पारण का समय क्या है?

षटतिला एकादशी 2023 कब है? (षट्तिला एकादशी 2023 कब है)

इस बार षटतिला एकादशी का व्रत 18 जनवरी 2022 यानि आज बुधवार के दिन रखा जा रहा है। जानें इस व्रत के नियम क्या हैं।

षटतिला एकादशी 2023 शुभ मुहूर्त (षटतिला एकादशी 2023 शुभ मुहूर्त)

षटतिला एकादशी तिथि प्रारंभ : 17 जनवरी मंगलवार को 06 बजकर 20 मिनट शाम से

षटतिला एकादशी समाप्त : 18 जनवरी बुधवार की शाम 04 बजकर 18 मिनट पर

व्रत पारण : 19 नवंबर गुरुवार सुबह 07 बजकर 2 मिनट से सुबह 09 बजकर 9 मिनट के बीच।

षटतिला एकादशी पूजा विधि (षटतिला एकादशी पूजा विधि)

  1. इस दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए।

  2. इसके बाद पूजा स्थलों की सफाई की जानी चाहिए। अब भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की मूर्ति, मूर्ति या उनके चित्र को स्थापित करना चाहिए।

  3. भक्तों को विधि-विधान से पूजा अर्चन करनी चाहिए।

  4. पूजा के दौरान भगवान कृष्ण के भजन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।

  5. प्रसाद, तुलसी जल, फल, नारियल, अगरबत्ती और फूल को दुनिया में अर्पित किया जाना चाहिए।

  6. अगली सुबह यानी द्वादशी पर पूजा के बाद भोजन का सेवन करने के बाद षट्तिला एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।

षटतिला एकादशी व्रत के नियम (षटतिला एकादशी नियम)

  • एकादशी व्रत के नियम दशमी की रात से ही शुरू हो जाते हैं, वास्तव में द्वादशी के दिन व्रत पारण के समय तक करना जरूरी माना जाता है।

  • दशमी की शाम को सूरज से पहले बिना लहसुन के सामान्य भोजन करना चाहिए।

  • रात में भगवान का मन्नत करते हुए सोएं। अगर जमीन पर देखें तो बहुत ही उत्तम होता है।

  • सुबह उठने के बाद स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद भगवान के विशेष एकादशी व्रत का संकल्प लें।

  • विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के दौरान षटतिला एकादशी व्रत कथा भी पढ़ें।

  • यदि संभव हो तो दिनभर निराहार रहें और शाम के समय फलाहार करें।

  • इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और किसी के बारे में विचार मन में न लें, न ही किसी की चुगली करें। हर वक्त प्रभु के नाम का जाप करें।

  • दूसरे दिन द्वादशी पर स्नान आदि के बाद भगवान का पूजन करें और किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान दें। इसके बाद अपने व्रत का पारण करें।

षटतिला एकादशी के दिन ऐसे करें तिल का प्रयोग

षटतिला एकादशी के दिन तिल का छह तरह से प्रयोग किया जाता है।

  • तिल मिश्रित जल से स्नान करें।
  • तिल का उबटन खतरनाक।

  • भगवान का तिलक करें।

  • तिल मिश्रित जल का सेवन करें।

  • फलाहार के समय मिष्ठान के रूप में तिल ग्रहण करें।

  • व्रत वाले दिन तिल से हवन करें या तिल का दान करें।

  • षटतिला एकादशी के दिन वैसे लोग जो व्रत नहीं रह रहे हैं, वे भी तिल के छह तरीकों से प्रयोग कर इस दिन पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

षटतिला एकादशी के दिन करें इन मंत्रों का जाप (षटतिला एकादशी मंत्र)

इन मंत्रों का करें जाप

1- ॐ नारायणाय नम:

2- ॐ विष्णवे नम:

3- ॐ हं विष्णवे नम:

4- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:

5- ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्

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