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Saturday, January 28, 2023

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PIB को मिलेगा सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की निगरानी का अधिकार, अगले महीने स्टेकहोल्डर्स से बात करेगी सरकार


नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर प्रसारित की जाने वाली फर्जी खबरें न केवल लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर देती हैं, बल्कि कई बार ऐसी खबरें देश में अपराध और अपराधियों को बढ़ावा भी दे देती हैं. केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) का फैक्ट चेक सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली फर्जी खबरों की सत्यता की परख करता है और फिर यह बताता है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित फलानी खबर फर्जी है. अब पीआईबी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली फर्जी खबरों को निगरानी करने का अधिकार देने की बात की जा रही है. उसे अधिकार देने के लिए सरकार अगले महीने अपने सभी हितधारकों से चर्चा करेगी.

पहले से अधिक सशक्त होगा पीआईबी

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को कहा कि सरकार की अधिकृत सूचना इकाई पीआईबी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर फर्जी खबरों की निगरानी का अधिकार दिए जाने के प्रस्ताव पर अगले महीने सभी हितधारकों के साथ चर्चा की जाएगी. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री चंद्रशेखर ने ‘पत्र सूचना कार्यालय’ (पीआईबी) को सोशल मीडिया पर खबरों की तथ्यपरकता परखने के लिए सशक्त किए जाने के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हम अगले महीने की शुरुआत में इस पर अलग से चर्चा करेंगे.

शिकायतों के आधार पर फैक्ट चेक करता है पीआईबी

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पिछले हफ्ते सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन का एक प्रारूप जारी किया था. इसमें सोशल मीडिया पर गलत, फर्जी या भ्रामक सामग्री की पहचान का जिम्मा पीआईबी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी को देने का जिक्र है. इसे ऑनलाइन मीडिया के एक हिस्से ने सरकारी नियंत्रण की कोशिश बताया है. प्रस्तावित संशोधन में सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि इस तरह की सामग्री को अपलोड या प्रसारित न किया जाए, जिसे पीआईबी की तथ्य पड़ताल इकाई पीआईबी फैक्ट चेक ने फर्जी या गलत पाया है. पीआईबी की इस इकाई को अपने पोर्टल पर आम लोगों से भेजी गई शिकायतों के आधार पर या स्वतः संज्ञान लेकर संदिग्ध सामग्री की सच्चाई पता करनी होगी.

31 जनवरी को अधिसूचित होगा नया नियम

हालांकि, संपादकों की शीर्ष संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में इस प्रस्ताव पर गहरी चिंता जताई है. गिल्ड ने कहा कि फर्जी खबरों का निर्धारण सिर्फ सरकार के हाथ में नहीं सौंपा जा सकता है, क्योंकि इसका नतीजा प्रेस को सेंसर करने के रूप में निकलेगा. इस बीच, चंद्रशेखर ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग के नियमन के लिए नियम 31 जनवरी तक अधिसूचित कर दिए जाएंगे. उसके बाद इसे संसद की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम को लेकर विचार-विमर्श की प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब इसे अधिसूचना जारी करने के लिहाज से तैयार किया जा रहा है.



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